अब तो चंद वर्ष बचे है
सब ख़त्म हो जायेगा
मौज मस्ती कर लो यारो
साथ में कुछ न जायेगा
यही आज टेलीविजनो के
हर चैनलों पर था आ रहा
चैनल का एंकर भी
न जाने कितना भय था दिखा रहा
लोग सहम गए है,जबसे
सुनने में आई है ये बात
डर के मारे अब तो
नींद न आती सारी रात
लोग अपने अपने भविष्य को लेकर
अभी से चिंतित हो गए
लगे सोचने की आखिर
कैसे पुरे होंगे सपने नए
मै भी सोचने को हुआ मजबूर
क्या प्रलय की बात सही है
ख़त्म हो जायेगी मानवता
क्या यह बात इक दम नयी है
बिन माझी की कश्ती की तरह तो
मानवता कब की डूब चुकी
नैतिक बातो के बोझ से
ये दुनिया कब की उब चुकी
रही प्रलय की बात
वो तो प्रतिदिन घट रही
अपने इन दुर्दिन के दिनों में
धरती भी है सिसक रही
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