जीवन का संघर्षो में
अनगिनत बार टुटा हु मै
बार बार बुलन्द हौसले के साथ
उनसे भिड़ाने को जुटा हु मै
जब जब समय की धरा मुझे
कमजोर करने लगी
जब जब उम्मीद की किरण
आँखों से दूर होने लगी
तब तब दिल को समझाकर
बाधाओ से ध्यान हटाकर
लक्ष्य पर निसाना लगाया
और समय के थपेड़ो को हटा
उनको मने अपनाया
जब जब दिल में मेरे
निराशा की हुक उठने लगी
मेरी मंजिल मेरी नजरो से
बहुत दूर लगने लगी
तब तब मुझे मानव की मानवता
अपनी श्रेष्ठता की एह्स्सास कराती रही
तब तब फिर बढे कदम मंजिलो की ओर
सोचा थोडा दूर ही सही
उ ही नहीं आज हम
धरा पर श्रेष्ठ है
चुकाई है इसकी पूरी कीमत
तब हमें मिला अपना यथेस्ट है
शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010
गुरुवार, 22 अप्रैल 2010
पप्पू पास हो गया
गुरूजी की दया से
आखिर पप्पू पास हो गया
और लोगो की नजरो में
तुरंत आम से खास हो गया
याद आते है पप्पू को
परीक्षा के वो सुनहरे दिन
नक़ल करने के लिए उसने
कैसे थे दिए पैसे पैसे गिन गिन
गुरूजी ने भी उस पर
पुत्रवत स्नेह बरसाया
पास होने के लिए पप्पू को
नक़ल का हर गुर सिखलाया
जान गया है पप्पू अब
नक़ल की महानता को
कैसे मिटा देती है ये
ज्ञान अज्ञान की असमानता को
आजकल अनगिनत पप्पू
हर जगह मिला करते है
हाथ में लेकर अपनी डिग्री
ताउम्र फिरा करते है
आंसू गिराते रहते है ये
देश की वयवस्था पर
चलो हम भी नजर द्दाल ले
इनकी दयनीय अवस्था पर
आखिर पप्पू पास हो गया
और लोगो की नजरो में
तुरंत आम से खास हो गया
याद आते है पप्पू को
परीक्षा के वो सुनहरे दिन
नक़ल करने के लिए उसने
कैसे थे दिए पैसे पैसे गिन गिन
गुरूजी ने भी उस पर
पुत्रवत स्नेह बरसाया
पास होने के लिए पप्पू को
नक़ल का हर गुर सिखलाया
जान गया है पप्पू अब
नक़ल की महानता को
कैसे मिटा देती है ये
ज्ञान अज्ञान की असमानता को
आजकल अनगिनत पप्पू
हर जगह मिला करते है
हाथ में लेकर अपनी डिग्री
ताउम्र फिरा करते है
आंसू गिराते रहते है ये
देश की वयवस्था पर
चलो हम भी नजर द्दाल ले
इनकी दयनीय अवस्था पर
बुधवार, 21 अप्रैल 2010
खोज
कर रहा जीवन की रपटीली रहो में
अपने अस्तित्व की खोज मै
सायद मिल जाये लक्ष्य मुझको
यही सोचता रोज मै
कौन हु,क्या करना है
जैसे अनसुलझे प्रश्न
करत्व निस दिन व्यथित मुझको
जो बता सके इन बातो को
धुड़ता firta mai usko
jeevan kya isi tarah
jine ka naam hai
ya khuchh aur bhi hai
jiska hame na gyan hai
gar mai in baato ka
bhed mai jaan jata
tab mai jeevan bhar
nischya hamesa muskurata
अपने अस्तित्व की खोज मै
सायद मिल जाये लक्ष्य मुझको
यही सोचता रोज मै
कौन हु,क्या करना है
जैसे अनसुलझे प्रश्न
करत्व निस दिन व्यथित मुझको
जो बता सके इन बातो को
धुड़ता firta mai usko
jeevan kya isi tarah
jine ka naam hai
ya khuchh aur bhi hai
jiska hame na gyan hai
gar mai in baato ka
bhed mai jaan jata
tab mai jeevan bhar
nischya hamesa muskurata
सिक्षा का अधकार कानून पर
अब हर चंपा निश्चय ही
काले अछर चिन्हेगी
बदलेगी अब जीवन धारा
अब कबाड़ न बिनेगी
आ गयी है देश में
शिछा की एक नयी क्रांति
सायद अब दूर हो जाए
अज्ञान की फैली अशांति
अब छोटू,घिस्सू,नाथू,
जैसो के चेहरों पर chamak dikh रही
पाना चाहते है वो भी ज्ञान
इसकी उनमे ललक दिख रही
अब समाज का हर तबका
ज्ञान से आलोकित होगा
खिलेगी अब हर कलि
हर इक बच्चा पुलकित होंगा
पर ये सब बाते
कही स्वपन न हो जाए
सुरु होने के पहले ही
खत्म कही न हो जाए
गर देश को विकसित करना है
सर्व समाज को शिछित करना है
हमें अभी से लगाना होगा
पूर्ण न हो lakshya jab तक ,हमें नहीं रुकना होगा
काले अछर चिन्हेगी
बदलेगी अब जीवन धारा
अब कबाड़ न बिनेगी
आ गयी है देश में
शिछा की एक नयी क्रांति
सायद अब दूर हो जाए
अज्ञान की फैली अशांति
अब छोटू,घिस्सू,नाथू,
जैसो के चेहरों पर chamak dikh रही
पाना चाहते है वो भी ज्ञान
इसकी उनमे ललक दिख रही
अब समाज का हर तबका
ज्ञान से आलोकित होगा
खिलेगी अब हर कलि
हर इक बच्चा पुलकित होंगा
पर ये सब बाते
कही स्वपन न हो जाए
सुरु होने के पहले ही
खत्म कही न हो जाए
गर देश को विकसित करना है
सर्व समाज को शिछित करना है
हमें अभी से लगाना होगा
पूर्ण न हो lakshya jab तक ,हमें नहीं रुकना होगा
बुधवार, 14 अप्रैल 2010
भुखमरी
आज इस धरा पर
इक बड़ी बिमारी फैली
मनुष्य है इससे प्रभावित
नाम है इसका भुखमरी
पेट के लिए ही तो
लोअग न जाने क्या के करते है
फिर भी इस धरा पर
करोनो के पेट न भरते है
वे मजबूर है
यूँ ही भूखा जीवन बिताने को
धरा पर इतना कुछ होते हुए भी
आधा पेट खाने को
भूख छीन लेती है
जिन्दगी जीने की शक्ति
न जाने कितने लोगो की
होती है असमय मृत्यु
इससे कुछ सोचने की शक्ति भी
ख़त्म हो चुकी होती ही
न जाने कितनी ललनाये
भूखे पेट सोती ही
इक बड़ी बिमारी फैली
मनुष्य है इससे प्रभावित
नाम है इसका भुखमरी
पेट के लिए ही तो
लोअग न जाने क्या के करते है
फिर भी इस धरा पर
करोनो के पेट न भरते है
वे मजबूर है
यूँ ही भूखा जीवन बिताने को
धरा पर इतना कुछ होते हुए भी
आधा पेट खाने को
भूख छीन लेती है
जिन्दगी जीने की शक्ति
न जाने कितने लोगो की
होती है असमय मृत्यु
इससे कुछ सोचने की शक्ति भी
ख़त्म हो चुकी होती ही
न जाने कितनी ललनाये
भूखे पेट सोती ही
मंगलवार, 13 अप्रैल 2010
नक्सलियों के हमलो पर दिल के उदगार
सानिया शोएब की शादी में उलझा हुआ है देश
इधर नक्सलियों के हमलो में रह जा रहे जवान खेत
सायद हमें आदत सी हो गयी है ,सच को यु छुपाने की
हर इक हमले के बाद बस यूँ ही बद्द्बदाने की
कहने को तो ये अपनो की अपनो से लड़ाई है
पर जाकर कोई उनको देखे जिनके अपनो ने प्राण गवाई है
अगर हम अब भी न चेते तो देर बहुत हो जाएगा
हम यूँ ही देखते रहेंगे और देश टुकड़ो में बात जाएगा
पिट लेता हु अपना सर नेताओं की बाते सुन
उनकी संवेदनाये भी न जाने कहा है गुम
कहा गए वो लोअग जो लगाते है नक्सलियों के लिए मदद की गुहार
क्या उन्हें सुनने नहीं दे रही देशवासियों की करूँ पुकार
हर इक हमले के बाद खून के आंसू रोया हु मै
याकि मानिए कई कई रात चैन न सोया हु मैं
इधर नक्सलियों के हमलो में रह जा रहे जवान खेत
सायद हमें आदत सी हो गयी है ,सच को यु छुपाने की
हर इक हमले के बाद बस यूँ ही बद्द्बदाने की
कहने को तो ये अपनो की अपनो से लड़ाई है
पर जाकर कोई उनको देखे जिनके अपनो ने प्राण गवाई है
अगर हम अब भी न चेते तो देर बहुत हो जाएगा
हम यूँ ही देखते रहेंगे और देश टुकड़ो में बात जाएगा
पिट लेता हु अपना सर नेताओं की बाते सुन
उनकी संवेदनाये भी न जाने कहा है गुम
कहा गए वो लोअग जो लगाते है नक्सलियों के लिए मदद की गुहार
क्या उन्हें सुनने नहीं दे रही देशवासियों की करूँ पुकार
हर इक हमले के बाद खून के आंसू रोया हु मै
याकि मानिए कई कई रात चैन न सोया हु मैं
कुछ स्वतंत्र पद
याद उन्हें किया जाता है जिन्हें भूलने का डर हो
उनको नहीं जिनके saath बिताना जिन्दगी का सफ़र ho
आप ने khud को भूलने ki बात बात हमें बताई
पर मैंने hai दिल me आपकी सूरत बसाई
२
मंजिलो को गर हमसफ़र बनाना चाहो
तो मन में असफलता का डर न हो
कार्य अपना करते जाओ बेहिचक ,चाहे
सामने तुम्हारे मुस्किलो का जहा हो
३
भले ही सामने खड़ा हो मुस्किलो का पहार
पर उ ही न माने आप अपनी हार
तईयार हो जाओ उनसे जूझने के लिए
लेके संकल्पों का हथियार
४
मजिल अभी दूर है बहले लोअग कहते रहे
पर aअप के कदम सदा उसी और बढ़ते रहे
मत घबराइये करोनो बाधाओ से
गर चाहते है की ज़माना आपकी दास्ताँ कहे
५
आप भले ही हम पर बेवफाई का इल्जाम लगाए
हम तो अब अब तक आपको भूल न पाए
जीवन भर आपको याद करते रहेंगे
भले ही आप हमें भूल जाए
६
जो जुदाई सह चुके है दर्द वाही जानते है
दुनिया वाले तो इसे कोरी बकवास मानते है
कोई हाले दिल उनसे पूछे ,जिन्होंने ये दर्द झेला है
अपना सब कुछ लुटा प्यार का खे ल खेला है
७
जख्मो को कुरेद कुरेद कर ,मेरा दर्द वो बढ़ाते रहे
अपने गम को छुपा हम सामने मुस्कुराते रहे
पर भला वो क्या जाने मेरे दर्द की गहराइयो को
दिखने को हमसे प्यार के दो बोअल कहे
८
उनके इसक का रंग कुछ चढ़ा इस कदर
उनके सिवा कोई दूजा न आये अब नजर
खुद मिट जाऊंगा या मिटा दूंगा साड़ी दुनिया को
साथ न उनका मुझे मिला अगर
९
जिन्दगी में कुछ करना चाहो तो
हिम्मत कभी न हारो
सफल होने के लिए मन की कमजोरी को मारो
सफलता बनेगी आपकी चेरी ,रास्ता केवल सही विचारो
१०
एक सुनहरी रात को मैंने देखा उनका सपना
चाह कर भी उस सपने को मई न बना सका अपना
उनसे दूर रहना तो जैसे की इक सजा है
jhuth कहते है kavi लोअग की जुदाई में ही असली मजा है
११
हर इक दिन को तुम अपना नया दिन मानो
असफलताओं को ही सफलताओं का मार्ग जानो
गर जान गए निराशा से आशा की राह
निसचय ही पूरी होगी जिन्दगी की हर चाह
उनको नहीं जिनके saath बिताना जिन्दगी का सफ़र ho
आप ने khud को भूलने ki बात बात हमें बताई
पर मैंने hai दिल me आपकी सूरत बसाई
२
मंजिलो को गर हमसफ़र बनाना चाहो
तो मन में असफलता का डर न हो
कार्य अपना करते जाओ बेहिचक ,चाहे
सामने तुम्हारे मुस्किलो का जहा हो
३
भले ही सामने खड़ा हो मुस्किलो का पहार
पर उ ही न माने आप अपनी हार
तईयार हो जाओ उनसे जूझने के लिए
लेके संकल्पों का हथियार
४
मजिल अभी दूर है बहले लोअग कहते रहे
पर aअप के कदम सदा उसी और बढ़ते रहे
मत घबराइये करोनो बाधाओ से
गर चाहते है की ज़माना आपकी दास्ताँ कहे
५
आप भले ही हम पर बेवफाई का इल्जाम लगाए
हम तो अब अब तक आपको भूल न पाए
जीवन भर आपको याद करते रहेंगे
भले ही आप हमें भूल जाए
६
जो जुदाई सह चुके है दर्द वाही जानते है
दुनिया वाले तो इसे कोरी बकवास मानते है
कोई हाले दिल उनसे पूछे ,जिन्होंने ये दर्द झेला है
अपना सब कुछ लुटा प्यार का खे ल खेला है
७
जख्मो को कुरेद कुरेद कर ,मेरा दर्द वो बढ़ाते रहे
अपने गम को छुपा हम सामने मुस्कुराते रहे
पर भला वो क्या जाने मेरे दर्द की गहराइयो को
दिखने को हमसे प्यार के दो बोअल कहे
८
उनके इसक का रंग कुछ चढ़ा इस कदर
उनके सिवा कोई दूजा न आये अब नजर
खुद मिट जाऊंगा या मिटा दूंगा साड़ी दुनिया को
साथ न उनका मुझे मिला अगर
९
जिन्दगी में कुछ करना चाहो तो
हिम्मत कभी न हारो
सफल होने के लिए मन की कमजोरी को मारो
सफलता बनेगी आपकी चेरी ,रास्ता केवल सही विचारो
१०
एक सुनहरी रात को मैंने देखा उनका सपना
चाह कर भी उस सपने को मई न बना सका अपना
उनसे दूर रहना तो जैसे की इक सजा है
jhuth कहते है kavi लोअग की जुदाई में ही असली मजा है
११
हर इक दिन को तुम अपना नया दिन मानो
असफलताओं को ही सफलताओं का मार्ग जानो
गर जान गए निराशा से आशा की राह
निसचय ही पूरी होगी जिन्दगी की हर चाह
रविवार, 11 अप्रैल 2010
हादसा
क्या गलती थी उसकी
हैवानो ने जिंदगी तबाह कर दी
मन की भूख मिटाने के लिए
इक मासूम की जिंदगी बर्बाद कर दी
इसी तरह की बाते
लोअग हर जगह सोचा करते है
और आँखे मुद कर
ऐसी घटनाएं देखा करते है
आज चारो तरफ वो
देखती है सहमी सहमी
ख़त्म हो गयी है जिंदगी उसकी
जब समाज से मिली बेरहमी
दूसरो के दानवपन से
ख़त्म हो गया उसका जीवन
उस एअक हादसे के बाद ही
झुलस गया उसका तन और मन
आज तो उसके जीवन से
सारा रस ही सुख गया
उम्र भर के लिए केवल
दुःख ही दुःख है छुट गया
आज यह दिखावे का समाज
छिनना चाहता उसकी जिन्दगी
गलतिया भले ही हो उनकी
पर मानते है उसे गंदगी
यह कहानी आज केवल
इक ही नहीं है
दुर्भ्याग्य बस आज
चाहू और ही यही है
इस भौतिकवादी समाज ने
आधी आबादी दबा डाली
कलियों के खिलने के पहले ही
उसे बुरी तरह मसल डाली
हैवानो ने जिंदगी तबाह कर दी
मन की भूख मिटाने के लिए
इक मासूम की जिंदगी बर्बाद कर दी
इसी तरह की बाते
लोअग हर जगह सोचा करते है
और आँखे मुद कर
ऐसी घटनाएं देखा करते है
आज चारो तरफ वो
देखती है सहमी सहमी
ख़त्म हो गयी है जिंदगी उसकी
जब समाज से मिली बेरहमी
दूसरो के दानवपन से
ख़त्म हो गया उसका जीवन
उस एअक हादसे के बाद ही
झुलस गया उसका तन और मन
आज तो उसके जीवन से
सारा रस ही सुख गया
उम्र भर के लिए केवल
दुःख ही दुःख है छुट गया
आज यह दिखावे का समाज
छिनना चाहता उसकी जिन्दगी
गलतिया भले ही हो उनकी
पर मानते है उसे गंदगी
यह कहानी आज केवल
इक ही नहीं है
दुर्भ्याग्य बस आज
चाहू और ही यही है
इस भौतिकवादी समाज ने
आधी आबादी दबा डाली
कलियों के खिलने के पहले ही
उसे बुरी तरह मसल डाली
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010
बालश्रम
बालश्रम को रोकने का
अधिनियम पारित हुआ
पर न जाने किन कारणों से
केवल हाथी दात साबित हुआ
आज भी न जाने कितने
देश के कर्णधार माने जाने वाले
असंख्यो बच्चे
सुबह से ही दिन रात जी तोड़ मेहनत करते है
और यही उनका भविष्य भी
बन जाता है
पर पता नहीं हमारे समाज को
कुछ समझ में क्यों न आता है
या शायद कुछ समझ में आता हो
पर उन लड़को के माँ बाप को
इसके सिवा दूजा
शायद ही कोई रास्ता नजर आता हो
मजबूरी बस पेट पालने के लिए ही
शायद पूरा जीवन जीते है
जन्म से लेकर मौत तक वे
केवल श्रम ही करते है
उन बच्चो के अपने सपने
बचपन में ही मिट जाते है
शायद उनके बालाधिकार भी
गुमनामी में गूम होते है
लोअग भूल जाते है की बच्चे ही
होते है कर्णधार धरा के
वे तो सपने देखते है
केवल अपनी रोटी के
पालको की दया पर निर्भर
सहते है शोषण ही शोषण
पर वे रोटी के कारन ही
मजबूरी बस करते धैर्य धारण
पतले पतले पैरो वाले
बड़े निकले पतो वाले
इन गरीब बच्चो के बल पर
यह देश अहम् भरता है
और यह दृश्य हमारे
समाज की विडम्बना को व्यक्त करता है
अधिनियम पारित हुआ
पर न जाने किन कारणों से
केवल हाथी दात साबित हुआ
आज भी न जाने कितने
देश के कर्णधार माने जाने वाले
असंख्यो बच्चे
सुबह से ही दिन रात जी तोड़ मेहनत करते है
और यही उनका भविष्य भी
बन जाता है
पर पता नहीं हमारे समाज को
कुछ समझ में क्यों न आता है
या शायद कुछ समझ में आता हो
पर उन लड़को के माँ बाप को
इसके सिवा दूजा
शायद ही कोई रास्ता नजर आता हो
मजबूरी बस पेट पालने के लिए ही
शायद पूरा जीवन जीते है
जन्म से लेकर मौत तक वे
केवल श्रम ही करते है
उन बच्चो के अपने सपने
बचपन में ही मिट जाते है
शायद उनके बालाधिकार भी
गुमनामी में गूम होते है
लोअग भूल जाते है की बच्चे ही
होते है कर्णधार धरा के
वे तो सपने देखते है
केवल अपनी रोटी के
पालको की दया पर निर्भर
सहते है शोषण ही शोषण
पर वे रोटी के कारन ही
मजबूरी बस करते धैर्य धारण
पतले पतले पैरो वाले
बड़े निकले पतो वाले
इन गरीब बच्चो के बल पर
यह देश अहम् भरता है
और यह दृश्य हमारे
समाज की विडम्बना को व्यक्त करता है
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