बुधवार, 11 अगस्त 2010

basant

जब जब बसंत आता है
नै उमंगे भी लाता है
पेड़ो पर नै नै कोपले
चारो तरफ की सुन्दर दृश्यावली
मानव मन को भाती है  
कोयले भी गाती है नित नए उत्साह से
सरसों भी फूलते है बड़े सुन्दर

आमो के बागो इ मौरे
उन पर काले काले भौरे
जैसे चले आते है दौड़े
प्रकृति सदा मुस्काती रहती
नित नए रूप दिखाती रहती

मानव का मन भी भर जाता
नित नए उत्साह से
बसंत तो है प्रेम की ऋतू
जीर्ण सिर्ण को त्याग कर
प्रकृति करती रूप नविन धारण

प्रकृति सदा मुस्काती रहती
प्रेम सदा बरसाती रहती
ऋतुराज की महिमा अनंत
यह है प्यारा प्यारा बसंत