रविवार, 11 अप्रैल 2010

हादसा

क्या गलती थी उसकी
हैवानो ने जिंदगी तबाह कर दी
मन की भूख मिटाने के लिए
इक मासूम की जिंदगी बर्बाद कर दी

इसी तरह की बाते
लोअग हर जगह सोचा करते है
और आँखे मुद कर
ऐसी घटनाएं देखा करते है

आज चारो तरफ वो
देखती है सहमी सहमी
ख़त्म हो गयी है जिंदगी उसकी
जब समाज से मिली बेरहमी

दूसरो के दानवपन से
ख़त्म हो गया उसका जीवन
उस एअक हादसे के बाद ही
झुलस गया उसका तन और मन

आज तो उसके जीवन से
सारा रस ही सुख गया
उम्र भर के लिए केवल
दुःख ही दुःख है छुट गया

आज यह दिखावे का समाज
छिनना चाहता उसकी जिन्दगी
गलतिया भले ही हो उनकी
पर मानते है उसे गंदगी

यह कहानी आज केवल
इक ही नहीं है
दुर्भ्याग्य बस आज
चाहू और ही यही है

इस भौतिकवादी समाज ने
आधी आबादी दबा डाली
कलियों के खिलने के पहले ही
उसे बुरी तरह मसल डाली

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