गुरूजी की दया से
आखिर पप्पू पास हो गया
और लोगो की नजरो में
तुरंत आम से खास हो गया
याद आते है पप्पू को
परीक्षा के वो सुनहरे दिन
नक़ल करने के लिए उसने
कैसे थे दिए पैसे पैसे गिन गिन
गुरूजी ने भी उस पर
पुत्रवत स्नेह बरसाया
पास होने के लिए पप्पू को
नक़ल का हर गुर सिखलाया
जान गया है पप्पू अब
नक़ल की महानता को
कैसे मिटा देती है ये
ज्ञान अज्ञान की असमानता को
आजकल अनगिनत पप्पू
हर जगह मिला करते है
हाथ में लेकर अपनी डिग्री
ताउम्र फिरा करते है
आंसू गिराते रहते है ये
देश की वयवस्था पर
चलो हम भी नजर द्दाल ले
इनकी दयनीय अवस्था पर
1 टिप्पणी:
brother it is a good comment over emitating in the examination prosecute your writing i wish you will have a bright future.
एक टिप्पणी भेजें