मंगलवार, 1 नवंबर 2011

kab

आज के इस दौर में
न जाने
कब भरेगा गरीबो का पेट

पुरे होंगे सपने उनके 
कब होगा
खुशियों से भेट

कूड़ा बीनते बच्चे 
कब जायेंगे इस्कूल     
आगे बढ़ने के लिए पढेंगे
कब जायेंगे
विपदा भूल

कब कोई गरीब
प्रेयसी को
पहना सकेगा फूलो का हार 
हँसता चेहरा देख कर
कब पा सकेगा खुशिया अपार 

कब बनेंगे आशियाने खुद के 
नापेंगे वो गगन को
उड़ के

कब तलक अमीर गरीब के 
बीच की मिटेगी खाई
दूर होंगे भेद सारे
कब होंगे सब लोग भाई भाई  
       

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