सोमवार, 1 अगस्त 2011

HAM HAI SARKAAR

हम है सरकार
नहीं किसी के विचारों
की
है हमे दरकार

जो मेरे साथ साथ चले
बस वही साथी है
मुझसे उलट चलने की सजा
गोली और लाठी है

जो जी में आएगा
हम वही करेंगे
लूटेंगे इस देश को
साथियो के घर भरेंगे

लूट डकैती भ्रस्ताचार
ये सब है मेरे सहचर
अनीति,बेशर्मी का हमने
प्रभु से
माँगा है वरदान कहकर

भूल के भी मेरे खिलाफ
कोई बात न कहना
सुन लो
जो हम कहे वही नियम है
इन बातो को हृदय में बुन   लो


कहने को नक्सलवाद ,भाई भतीजावाद
हम मिटाते है
पर परोपकार के चलते
फिर से इन्हे जिलाते है

खत्म होगा हर विचार
खिलाफत करेगा जो हमारी
मत आना सामने कभी
आखिर
क्या औकात है तुम्हारी

पक्ष विपक्ष हम भाई भाई
इधर न देखो
तुम हो aam  जन
मनमर्जी करने दो हमको
नहीं तो
लाठिया पड़ेंगी दनादन

गरीबो को मिटाकर करेंगे
अमीरों से प्यार
क्युकी
हम है सरकार
नहीं किसी के विचारों की
है हमे दरकार

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