चलो चलकर जलाए
मोमबत्तिया
हमभी किसी चौक पे
कैमरों के सामने हो खड़े
मुस्कुराए बड़े शौक से
इसी बहाने कम से कम
अखबारों में छप जायेंगे
हमारी पहचान के चर्चे
हर जुबा पे बस जायेंगे
लगा ले पावडर
चमका ले चेहरे की कान्ति को
तभी तो जलाकर मोम बत्ती
बुला सकेंगे विश्व शांति को
किसी के परिजन
मरे सीमा पर
या झेले आतंकियों का प्रहार
जलाएंगे हम मोम बत्ती
पहनने को चर्चा का हार
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें