जब जब बसंत आता है
नै उमंगे भी लाता है
पेड़ो पर नै नै कोपले
चारो तरफ की सुन्दर दृश्यावली
मानव मन को भाती है
कोयले भी गाती है नित नए उत्साह से
सरसों भी फूलते है बड़े सुन्दर
आमो के बागो इ मौरे
उन पर काले काले भौरे
जैसे चले आते है दौड़े
प्रकृति सदा मुस्काती रहती
नित नए रूप दिखाती रहती
मानव का मन भी भर जाता
नित नए उत्साह से
बसंत तो है प्रेम की ऋतू
जीर्ण सिर्ण को त्याग कर
प्रकृति करती रूप नविन धारण
प्रकृति सदा मुस्काती रहती
प्रेम सदा बरसाती रहती
ऋतुराज की महिमा अनंत
यह है प्यारा प्यारा बसंत
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