YARANA
KAVITAAYE JO CHHU LE DIL KO
शनिवार, 20 मार्च 2010
सोचु
मुस्कुराती रहु इठलाती रहु
बस एक ही नाम गुनगुनाती रहु
मिलन की आस कुछ ऐसी लगी की
ख्वाबो में भी उनको बुलाती रहु
मेरे उर में आ रही है
बस प्रियतम की याद
सोचु अब मै बिन उनके
कैसे कटेगा ये मधुमास
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